शतावरी के फायदे और नुकसान

शतावरी हिमालय में पाई जाने वाली जड़ी बूटियों में से एक है। यह आयुर्वेद की दुनिया की सबसे प्राचीन जड़ी बूटी है। भारतीय औषधियों पर लिखे गए प्राचीन ग्रंथों में भी शतावरी का उल्लेख मिलता है। शतावरी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो स्त्री प्रजनन प्रणाली में सुधार लाने में सहायता करती है। यह जड़ी-बूटी 100 से भी अधिक रोगों को ठीक करने में सक्षम है। शतावरी तनाव और बढ़ती उम्र की समस्याओं को ठीक करने के लिए भी लाभदायक है। आयुर्वेद में शतावरी को जड़ी बूटियों की रानी भी कहा जाता है।

​ मुख्य रूप से शतावरी भारतीय उप महाद्वीप के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाती है लेकिन भारत के हिमालय इत्यादि क्षेत्रों में भी यह जड़ी-बूटी भरपूर मात्रा में पाई जाती है। ​संस्कृत भाषा में इसे सतमूली या शतमूली भी कहते हैं । ​​अध्ययन से पता चलता है कि ग्लूटाथिओन हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है और यह शतावरी में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ग्लूटाथिओन से शरीर की गंदगी बाहर निकलती है।

​शतावरी का पौधा झाड़ीनुमा कांटेदार होता है। जो लगभग 1 मीटर से 2 मीटर तक लंबा होता है। शतावरी पौधे के फूल सफेद रंग के होते हैं जो देखने में बहुत सुंदर होते हैं। शतावरी के जड़े 1 से 2 मीटर तक लंबी और मोटी होती है। इसमें कई प्रकार के महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते हैं। ​अगर हम बात करें इसमें पाए जाने वाले तत्वों की तो इसमें अनेक प्रकार के विटामिन, पोटेशियम, आयरन, जिंक ,कैलशियम ,कार्बोहाइड्रेट फाइबर, फास्फोरस, एंटीऑक्सीडेंट ओमेगा 3 आदि कई मुख्य तत्व शतावरी में पाए जाते हैं।

​ शतावरी के फायदे ‌

  1. शतावरी पित्ताशय के दर्द में काफी आरामदेह है। यह पित्ताशय में होने वाले दर्द को दूर करता है।
  2. ​गर्भवती महिलाओं के लिए शतावरी टॉनिक काफी फायदेमंद होता है। शताब्दी में कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए आवश्यक होते हैं।
  3. ​एसिडिटी को दूर करने के लिए शतावरी बहुत असरदार है। शतावरी में फाइबर तथा एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो एसिडिटी को खत्म करते हैं।
  4. ​मधुमेह एक जटिल रोग है जिसे रोकना आवश्यक है। शतावरी के गुण मधुमेह को नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं। इसलिए मधुमेह के इलाज के लिए शतावरी का उपयोग करना चाहिए।
  5. ​शतावरी में कई प्रकार के प्रोटीन पाए जाते हैं जो मानव शरीर को कैंसर से बचाते हैं।शतावरी कैंसर का पूर्ण इलाज नहीं है लेकिन शतावरी से कैंसर को होने से रोका जा सकता है ।

​​इन इन सभी तथ्यों के अलावा शतावरी अल्सर त्वचा को निखारने बवासीर खांसी जुखाम दुबलापन बुखार आदि को नियंत्रित करने में भी लाभदायक होती है।

​शतावरी शतावरी के नुकसान

  1. शतावरी का इस्तेमाल किडनी में पथरी वाले रोगियों को नहीं करना चाहिए।
  2. ​शतावरी में पोटेशियम होता है और अत्यधिक पोटेशियम का सेवन करने से सांस लेने में दिक्कत और सीने में जलन हो सकती है।
  3. शतावरी का अत्यधिक सेवन करने से एलर्जी गैस जैसे इत्यादि रोग हो सकते हैं इसलिए जिन लोगों को एलर्जी की समस्या हो उन्हें इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

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